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दुनिया का हर पांचवा बच्चा भारत में रहता है। इनकी संख्या लगभग 43 करोड़ है। 18 साल से कम उम्र का प्रत्येक बच्चा इसके प्रावधानों का लाभ उठा सकता है। भारत सरकार की मानें तो इनमें से 40 फीसदी बच्चे किसी न किसी रूप में अपने अधिकारों से वंचित हैं। उक्त बातें सर्टिफाइड पुलिस काउंसलर डॉ आभा शशिकुमार ने आज कहीं। वे एमजे कालेज द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रही थीं।

महाविद्यालय की निदेशक डॉ श्रीलेखा की प्रेरणा से आयोजित इस ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ शशिकुमार ने कहा कि हालांकि इस कानून के तहत अब तक सर्वाधिक मामले शारीरिक शोषण के लिए गए हैं पर इसका दायरा इससे कहीं ज्यादा विस्तृत है। बेघर बच्चे, भूखे बच्चे, पेट भरने के लिए काम करने वाले बच्चे, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित बच्चे सभी इसके अंतर्गत आते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हम इस कानून के प्रावधानों को विस्तार से नहीं समझ लेते हम इन बच्चों की मदद नहीं कर पाएंगे। इसलिए जागरूकता कार्यक्रमों की महति आवश्यकता है। उन्होने एमजे कालेज को इस आयोजन के लिए साधुवाद दिया।
कार्यक्रम के आरंभ में शिक्षा संकाय की सहायक प्राध्यापक ममता एस राहुल ने अतिथि का परिचय दिया। उन्होंने विषय प्रवेश कराते हुए पॉक्सो एक्ट पर कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़े हुए थे।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनिल कुमार चौबे ने कहा कि कोई भी कानून का उद्देश्य तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक कि उसे जानने और समझने वाले लोग समाज में न हों। इस कार्यशाला से लोगों को इस कानून और इसके प्रावधानों की जानकारी मिली है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागी अपने अपने स्तर पर बाल अधिकारों की सुरक्षा का प्रयास करेंगे। उन्होंने इस उपयोगी कार्यशाला के लिए डॉ शशिकुमार के प्रति आभार व्यक्त किया।